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आर्यन को मासूम मुसलमान बताकर कुछ नहीं हुआ तो अब हिंदुत्व का मजाक करना शुरूकर दिया

आर्यन खान कई दिनों से ड्र’ग्स मामले को लेकर लगातार चर्चा का विषय बने हुए है. आर्यन खान ड्र’ग्स मामले में जेल से रिहा होने के लिए जमानत का इंतजार कर रहे शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान को अपने पक्ष में कहानी सेट करने के लिए निर्दोष से लेकर मुस्लिम तक घोषित किया गया है. अब इस मामले में हिंदुत्व कोण भी दिया गया है.

जानकारी के लिए आपको बता दें कि एनसीबी ने इस साल ड्र’ग्स से जुड़े करीब 94 मामले दर्ज किए हैं. इन मामलों में कॉमेडियन भारती सिंह और उनके पति हर्ष लिम्बाचिया सहित कई लोगों को गि’रफ्तार किया गया था. लेकिन, बॉलीवुड के ‘किंग खान’ कहे जाने वाले शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान की गि’रफ्तारी के बाद से देश में ऐसा माहौल बन गया है जैसे पहले ड्र’ग का कोई मामला ही नहीं था. गि’रफ्तारी नहीं हुई है. हैरानी की बात कही जा सकती है कि क्रूज रेव पार्टी में गि’रफ्तार हुए लोगों के अलावा सिर्फ आर्यन खान ही चर्चा में हैं. खैर शाहरुख खान के बेटे होने के नाते बॉलीवुड के कई सितारे आर्यन खान के समर्थन में खुलकर सामने आए. ‘किंग खान’ को जो सपोर्ट मिल रहा है, वह कोई बड़ी बात नहीं है. लेकिन, आर्यन खान की गि’रफ्तारी के बाद माना जा रहा था कि जल्द ही ‘पीड़ित कार्ड’ खेल रहा जमात आर्यन को मुस्लिम घोषित कर सक्रिय हो जाएगा.

दरअसल, कुछ बॉलीवुड अभिनेताओं, कथित बुद्धिजीवियों और राजनेताओं ने मुस्लिम होने के कारण इस कार्रवाई को निशाना बनाया है. महबूबा मुफ्ती से लेकर आरफा खानम शेरवानी तक, उन्होंने आर्यन खान को ‘निर्दोष से मुस्लिम’ घोषित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है. यह अलग बात है कि इसी क्रूज रेव पार्टी मामले में गि’रफ्तार अन्य आरोपियों के धर्म से जुड़ी कोई जानकारी अभी तक सामने नहीं आई है. इतना ही नहीं आर्यन खान की गि’रफ्तारी के बाद से कई लोगों ने एनसीबी अधिकारी समीर वानखेड़े के खिलाफ अपनी पुरानी शिकायतों को निकालना शुरू कर दिया है. आसान शब्दों में कहें तो आर्यन को जमानत दिलाने के लिए जहां हाई प्रोफाइल वकील सतीश मानशिंदे कोर्ट में अपना दमखम झोंक रहे हैं. वहीं सोशल मीडिया समेत अन्य अप्रत्यक्ष तरीकों से लोगों के बीच यह आख्यान स्थापित किया जा रहा है कि आर्यन खान को मुस्लिम होने और शाहरुख खान का बेटा होने का निशाना बनाया जा रहा है. खैर, अब इस मामले में हिंदुत्व का एंगल भी घसीटा गया है.

आर्यन खान की गि’रफ्तारी के मामले में गौरी खान की एंट्री उस दिन हुई जब आर्यन की जमानत पर सुनवाई उसके जन्मदिन के दिन होनी थी. जमानत नहीं मिलने पर गौरी खान का कार के अंदर बैठकर रोने का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया. अब तक मुसलमानों के कारण निशाना बनाए जा रहे मुद्दे को हिंदुत्व की ओर मोड़ दिया गया है. हिंदुत्व को मुस्लिम एंगल से जोड़ने के लिए शाहरुख खान की पत्नी गौरी खान का सहारा लिया गया है. दरअसल, सभी जानते हैं कि शाहरुख खान से शादी करने से पहले गौरी खान हिंदू थीं. गौरी खान ने एक टॉक शो में भी कहा था कि मैं पति शाहरुख खान के धर्म का सम्मान करती हूं, लेकिन मैंने धर्म परिवर्तन नहीं किया है. तो लब्बोलुआब यह है कि आर्यन खान को बचाने के लिए वकीलों द्वारा दी जा रही दलीलों के अलावा लोगों के पास आर्यन खान के लिए एक समर्थन अभियान चलाने का एक और कारण है.

दरअसल, लेखक देवदत्त पटनायक ने एक ट्वीट में लिखा है कि नवरात्रि के दौरान एक गौरी के बेटे को जेल में डाल दिया गया था. अब इस ट्वीट के बारे में बताने की जरूरत नहीं होगी कि देवी दुर्गा का एक नाम गौरी भी है. वहीं गौरी का नाम लेकर हिंदुत्व का मजाक उड़ाने की कोशिश की गई है. दरअसल, देवदत्त पटनायक के इस ट्वीट को मुस्लिम होने की वजह से निशाना बनाए जाने की बात को हल्का करने की कोशिश माना जा रहा है. क्योंकि आर्यन खान के नाम पर मुस्लिम पक्ष से इतना समर्थन नहीं मिल सका. आर्यन खान का मुस्लिम होने का तर्क उनके लिए ज्यादा काम का नहीं लगता.

वहीं पत्रकार आरफा खानम शेरवानी ने आर्यन खान मामले पर ट्वीट कर लिखा था कि आर्यन खान का मामला उनके ड्र’ग्स के सेवन से जुड़ा नहीं है, बल्कि सीधे शाहरुख को निशाना बनाने का है. आजाद देश में आर्यन खान को जमानत का मौलिक अधिकार नहीं दिया जा रहा है. इसमें कोई शक नहीं कि शाहरुख खान हमारे समय के सबसे बड़े मुस्लिम सुपरस्टार हैं. सजा जैसी कार्रवाई उनके लिए एक संदेश है कि आप भी पक्ष बदल लें. खैर, कुछ ऐसा ही पीडीपी चीफ महबूबा मुफ्ती ने भी शाहरुख खान को सपोर्ट करने के लिए कहा था.

सीधे शब्दों में कहें तो इन सभी बुद्धिजीवियों, कलाकारों और नेताओं के पास अब किसी भी मामले में दक्षिणपंथ को निशाना बनाने के लिए ज्यादा कुछ नहीं कहना है. ऐसे में ये सभी लोग मुस्लिम विक्टिम कार्ड और हिंदू देवी-देवताओं और त्योहारों का मजाक उड़ाने को मजबूर हैं. क्योंकि आर्यन खान केस में कानून और कोर्ट अपना काम कर रहे हैं. लेकिन, इन तथाकथित बुद्धिजीवियों के लिए समर्थन जुटाना भी मुश्किल हो रहा है.

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