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लाल दिये की आलीशान कार में घूमने वाली जूली पर आ गयी बकरियां संभालने की नौबत, वजह जानकर आप भी हो जायेंगे हैरान

वो लाल दिये की आलीशान कार में घूमती- फिरती थीं: लेकिन आज उसपर बकरीयों को संभालने की नौबत आ पङी है, आखिर क्या हुआ उसके साथ…

दोस्तों इस दुनिया में कब कौनसा आविष्कार हो जाए, इसके बारे में हम कुछ बता नहीं सकते। किस व्यक्ति को कब और किस परिस्थिति से गुजरना पङे; यह तो हम सोच भी नहीं सकते। वक्त कभी किसी शख्स को जन्नत की खुशी दिलाता है, तो कभी किसी को रास्ते पर भी लेकर आता है। लेकिन एक बात तो है, हर एक व्यक्ति का यह सपना तो जरूर होता है कि, उसे राजकीय सुख प्राप्त हो।

समय बेहद किमती होता है। कोई भी नेक काम करने के लिए अगर वक्त आपके साथ नहीं है, तो फिर आपका वह काम कभी भी पूरा नहीं होगा। साथ ही में आपको कई मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। ऐसी ही एक घटना शिवपुरी जिले में सामने आयी है। वहाँ की एक महिला जो हमेशा लाल दिये की गाड़ी से आती- जाती रहती थीं। बङे- बङे अफसर भी उसे सलाम करते थें, ऐसे उस महिला के थांट थे। लेकिन आज वहीं महिला बकरीयों को संभाल रही है और अकेली ही अपना जीवन बिता रही है।

एक समय था, जब राज्यमंत्री का पद संभालनेवाली जुली लाल दिये की कार में घूमती- फिरती थीं। सारे उच्च अधिकारी भी उसे सलाम करते हुए जाते थें। लेकिन यह वक्त भी बङा कमबख्त होता है। आज कि वक्त में उसी महिला को दो वक्त की रोटी भी नसीब नहीं होती है। बदलते हुए समय की वजह से उसके ऊपर आज एक छोटी सी टपरी में रहने की नौबत आ पङी है।

इस प्रकार से बदल गया उसका नसीब

जुली आदिवासी का नसीब उस वक्त पुरा बदल चुका था, जब वो कोलारस के माजी आमदार रामसिंग यादव इनके पास मजदूर का काम करती थीं। साल 2005 में उन्होंने जुली को जिला पंचायत का सदस्य बनाया था। उसके बाद शिवपुरी के माजी आमदार वीरेंद्र रघुवंशी इन्होंने उसे जिला पंचायत अध्यक्ष की पद तक पहुंचाया।

करीबन 5 सालों तक जुली को राज्यमंत्री पद का दर्जा प्राप्त हुआ। तभी से उसे बङे – बङे अफसर लोग भी सम्मानपूर्व सलाम करने लगे थें। उसके बाद जुली का लाल दिये की गाड़ी से आना- जाना शुरू हुआ। लेकिन वक्त भी ऐसा घूम गया की, आज उसी जुली को अपना पेट पालने के लिए बकरीयों को संभालने की नौबत आ पङी।

जुली को जिला पंचायत अध्यक्ष के पद से निकालने के बाद उसे किसी ने पूछा तक नहीं। इसी वजह से उसे आज ऐसी स्थिति में जीना पङ रहा है। इंदिरा आवास योजनानुसार उसे एक “कॉटेज” प्राप्त हुआ। किंतु उसमें भी भ्रष्टाचार हुआ। सरकारी कागजों के अनुसार उसे इंदिरा आवास की योजनानुसार “कॉटेज” तो मिला हुआ है। लेकिन सच तो यहीं है कि, वो एक झोपङे में रह रही है।

बकरीयों को संभालने के लिए हर महिने को 50 रु. मिलेंगे, ऐसा जुली को माजी राज्यमंत्री ने बताया था। फिलहाल वो ऐसी ही कठिनाई से अपना गुजारा कर रही है। बकरीयों को संभालने के अलावा वो गुजरात में जाकर खेती का काम भी करती है।

जुली को जिला पंचायत की अध्यक्षा बनानेवाले माजी आमदार वीरेंद्र रघुवंशी इन्होंने ऐसा ‘आ’रो’प’ लगाया कि, जुली आज जिस स्थिति में है, उसके जिम्मेदार माजी आमदार रामसिंग यादव उनके बेटे जो अभी के आमदार है।

माजी आमदार रामसिंग यादव इन्होंने साङेचार सालों तक जुली का शो’ष’ण किया। उसके बाद उसे कभी भी पूछा ही नहीं, इसलिए आज जुली की यह हालत हुई है। वीरेंद्र रघुवंशी इन्होंने जुली को जब अध्यक्ष किया था, तभी वो काँग्रेस पक्ष के नेते थें, किंतु अभी वो भाजपा में शामिल हुए।

वक्त वक्त की बात है, यह वक्त आज साथ देता है, तो कल कहीं बिछङ जाता है। तो हमारे प्यारे दोस्तों आपको हमारा आर्टिकल कैसा लगा, यह हमें आप कमेंट्स के जरिए जरूर बताइए और हाँ लाईक और सब्सक्राइब भी अवश्य करिए। ताकि आपको हमारे आर्टिकल्स के सारे लेटेस्ट अपडेट्स मिलते रहें। आप के मनोरंजन खातिर हम ऐसे ही अलग और मजेदार किस्से आपके लिए हमेशा लिखते रहेंगे। आप सभी का साथ यूं ही हमेशा बना रहे, इसी उम्मीद के साथ लेते है आपसे विदा….।।

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