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राजेश खन्ना के अपने दामाद अक्षय कुमार क्यों नहीं करते थे उनका सम्मान, वजह जानकर हैरान हो जाओगे…

बॉलिवुड इंडस्ट्री में राजेश खन्नाजी को हम सभी जानते है। राजेश खन्ना का जन्म 29 दिसंबर 1942 को अमृतसर में हुआ था। उन्होंने टॅलेंट हंट के जरिए फिल्मी दुनिया में एन्ट्री की थीं। उनका असली नाम जतिन अरोरा था। लेकिन लोग उन्हें प्यार से काका बुलाते थें। बॉलीवुड में राजेश जी ने फिल्म “आखरी खत” से एक्टिंग की शुरुआत की थी। लेकिन “आराधना” फिल्म ने उन्होंने बॉलीवुड की दुनिया में स्टार बनाया था। राजेशजी ने 1968- 70 और उसके बाद आनेवाली तमाम फिल्मों ने उन्हें बॉलीवुड का सुपरस्टार बना दिया था। उन दिनों राजेश खन्ना की फिल्में बहुत हिट हो जाती थीं।

राजेश खन्नाजी ने 1973 में ङिम्पल कपाड़िया से विवाह कर लिया। तभी उनका अफेअर “अंजु महेंद्रु” से शुरू था। अंजू को तो वो फिल्मी दुनिया में आने से पहले ही जानते थें। फिल्म बॉबी की अपार सफलता और फिल्मी करियर की दीवानगी ने ङिम्पल और राजेश के वैवाहिक जीवन में दरार शुरू होने लगी। 1984 में वो दोनों एक- दूसरे से अलग हो गए। उसके बाद अभिनेत्री टीना मुनीम के साथ उनका रोमांस विदेश जाने तक शुरू रहा।

साल 1975 के साथ आनेवाली एक्शन फिल्मों ने जगह बनाना शुरू कर दी। अमिताभ जैसे कई दूसरे एक्टर्स की फिल्में हिट होने लगी। रोमांटिक फिल्में असफल होने लगी। दौर के साथ-साथ ट्रेंङ बदलता चला गया और फिल्म इंडस्ट्री से उनका कदम निकलता चला गया। उसके बाद राजेश खन्ना बङे पर्दे और राजनीति दोनों से गायब हो चुके थे। उसके बाद उनकी आर्थिक स्थिति इतनी दयनीय हो गयी थीं कि, ङेढ करोङ रुपए की जो देनेदारी उनके ऊपर लगायी थीं और उसे वो चुका भी नहीं पा रहे थें। फिर टैक्स चुका न पाने की वजह से उनका “आशीर्वाद” बंगला भी सील कर दिया गया।

पत्नी डिम्पल, दो बच्चे और दामाद जैसे पैसेंवाले लोगों के रहते हुए भी टैक्स चुकाना न जाना, बङी सोचने की बात है। एक समय था, जब वह अपने स्टारङम से सूरज को भी मात देनेवाले और हमेशा फैन्स के घेरे में रहनेवाले अकेले पङ नहीं गए थें। बॉलीवुड में कोई भी काम न मिलने कारण राजेशजी को “वफा” जैसी फिल्म करनी पड़ी। बॉलीवुड में सलमान खान, शाहरुख खान, अक्षय कुमार ये सभी उन्हें सुपरस्टार मानते रहें। लेकिन उन्हें कभी भी किसी ने कोई काम नहीं दिया। अक्षय अपनी फिल्मों में बङे भाई या पिता का रोल अपने ‘काका’ को नहीं देते थे, बल्कि अमिताभ बच्चन या किसी और एक्टर को वह रोल देते थे। अक्षय कुमार खुद भी जिस फिल्म के निर्माता रहते, फिर भी उन्होंने कभी भी काका को फिल्म में नहीं लिया। हमेशा ही वह राजेशजी के साथ अछूत व्यवहार करते आए। वह आखरी तक काम के लिए तरसते रहें, किन्तु उन्हें कोई पूछने तक नहीं आया।

राजेशजी चाहते थे कि, जिस रुतबे में उनका कल गुजरा है, वहीं आखिर तक टिका रहें। हमेशा लोग उन्हें मिलने के लिए आए, उनके स्टारङम को महसूस करें। अॅटिटयूङ, अकङपण, मिजाज और गुस्सा उनका पहले से ही रहा है। कामयाबी के नशे को वह संभाल ही नहीं पाए।
यह बात भी बिल्कुल सच है, कि उन्होंने काम के लिए कभी भी किसी के सामने हाँथ नहीं फैलाया था। परिवार से दूरियाँ, काम का तणाव इससे उन्हें सिगरेट की लत लग गयी। फिर उन्हें कैंसर हो गया। 18 जुलाई 2012 को उनका देहांत हो गया।

दोस्तों, आपको हमारा आर्टिकल कैसे लगा, यह नीचे कमेंट में जरूर बताइए।

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